माँ कालरात्री
दिनांक :- 15=4=2024
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दिन :-- सोमवार
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विषय :- स्वैच्छिक
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-----------{ " माँ कालरात्री " }------------
सातवें दिन मैया कालरात्री का दरबार है सजता ,
माँ कालरात्री का रूप बड़ा भयंकर है दिखता ।
अपने भक्त जनों को मैया , कभी नहीं है डराती ,
दुष्टों का विनाश करके , उन्हें सज़ा है दिलाती ।
गर्दभ पर है सवारी इस की , खडग इस के हाथ में ,
भूत-प्रेत इस को देखकर , इस से दूर-दूर हैं भागते ।
रूप है इस का काला, और बाल भी हैं बिखरे ,
गले में है भव्य माला पहनी , नैन इस के हैं उजले ।
दानव-दैत्य-भूत-पिशाच, स्मरण से ही नाश है करती ,
भक्तजनों के ग्रहों - विपतीयों को क्षण में है ये हरती ।
सातवां दिन माँ का , आओ ह्रदय से मनाएं ,
ग्रहों की समस्त बाधाओं को हम दूर भगाएं ।
-- गोविन्द " आनंद "_✍️
******** जय माता दी *********
Mohammed urooj khan
17-Apr-2024 11:45 PM
👌🏾👌🏾👌🏾
Reply
Gobind Rijhwani "Anand"
16-Apr-2024 07:59 AM
जय माता दी 🌷🌷🎊🌷🌷
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Babita patel
16-Apr-2024 05:34 AM
Superb
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